सम्पूर्ण दैनिक पंचायतन पूजा विधि ( Complete Daily Panchayatan Puja Vidhi – Step-by-Step, मंत्र सहित)
अगर आप सनातन धर्म की पंचायतन पूजा विधि सीखना चाहते हैं और ऐसी व्यवस्था चाहते हैं कि एक ही जगह पर सब कुछ मिल जाए, तो यह लेख आपके लिए है। इसे आप सीखकर या प्रिंट करके रोज़ उपयोग कर सकते हैं।
- 🌼 पंचायतन पूजा क्या है?
- 🕉️ पंचायतन पूजा का महत्व
- 🪔 पंचायतन पूजा में कौन-कौन से देवता होते हैं?
- 🔱 पंचायतन पूजा का सही समय
- 🧴 पंचायतन पूजा की आवश्यक सामग्री
- 📿 पंचायतन पूजा विधि का क्रम
- 🙏 पंचायतन पूजा करते समय ध्यान रखें
- ✨ पंचायतन पूजा का आध्यात्मिक रहस्य
- 🏹 नारायण पंचोपचार
- 🍽️ नैवेद्य प्राण
- 📿 जप
- 📜 स्तोत्र
- 🌸 पुष्पांजलि
- 🔄 प्रदक्षिणा
- 🔔 आरती
- 🙏 क्षमा प्रार्थना
- 🌺 निष्कर्ष
🪔 पंचायतन पूजा विधि (मंत्र सहित) – संपूर्ण दैनिक मार्गदर्शिका
पंचायतन पूजा हिन्दू धर्म की एक अत्यंत प्राचीन और शक्तिशाली उपासना पद्धति है, जिसमें पाँच प्रमुख देवताओं की एक साथ आराधना की जाती है—भगवान शिव, भगवान विष्णु, देवी शक्ति, भगवान गणेश और भगवान सूर्य।
इस विधि का उद्देश्य यह है कि साधक एक ही स्थान पर सभी प्रमुख देवताओं की उपासना कर सके और जीवन में संतुलन, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर सके।
यह लेख आपको पंचायतन पूजा विधि (मंत्र सहित) पूरी तरह व्यवस्थित रूप में प्रदान करता है, ताकि आप घर पर ही शास्त्रोक्त तरीके से दैनिक पूजा कर सकें।
🌼 पंचायतन पूजा क्या है?
पंचायतन पूजा एक ऐसी उपासना प्रणाली है जिसमें पाँच देवताओं को एक मंडल (setup) में स्थापित कर पूजा की जाती है। यह परंपरा विशेष रूप से आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित मानी जाती है, जिसका उद्देश्य विभिन्न देवताओं की उपासना को एकीकृत करना था।
इस पूजा में—
- केंद्र में मुख्य देवता (अक्सर शिव या विष्णु)
- चारों ओर अन्य देवता स्थापित किए जाते हैं
यह व्यवस्था ब्रह्मांडीय संतुलन और पंचतत्वों के सामंजस्य का प्रतीक मानी जाती है।
🕉️ पंचायतन पूजा का महत्व
नियमित रूप से पंचायतन पूजा करने से—
- सभी प्रमुख देवताओं की कृपा एक साथ प्राप्त होती है
- जीवन में संतुलन और स्थिरता आती है
- घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांति बनी रहती है
- आध्यात्मिक विकास तेज होता है
- ग्रह दोष और बाधाएं कम होती हैं
पंचायतन पूजा को “सम्पूर्ण पूजा” इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह एक ही साधना में सभी प्रमुख शक्तियों का आह्वान करती है।
🪔 पंचायतन पूजा में कौन-कौन से देवता होते हैं?
पंचायतन पूजा में पाँच देवताओं का समावेश होता है—
- भगवान शिव – केंद्र (अधिकतर)
- भगवान विष्णु
- देवी शक्ति
- भगवान गणेश
- भगवान सूर्य
कुछ परंपराओं में केंद्र देवता बदल भी सकता है, लेकिन पाँचों का पूजन अनिवार्य माना जाता है।
🔱 पंचायतन पूजा का सही समय
- सुबह का समय (ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के बाद) सबसे श्रेष्ठ
- शाम को दीप जलाकर भी पूजा की जा सकती है
- नियमित समय पर पूजा करने से अधिक लाभ मिलता है
🧴 पंचायतन पूजा की आवश्यक सामग्री
पंचायतन पूजा के लिए सामान्य सामग्री—
- पाँच देवताओं की मूर्ति या चित्र
- जल, कलश
- चंदन, अक्षत
- फूल / बेलपत्र
- धूप, दीपक
- नैवेद्य (फल या मिठाई)
- घंटी
इन सामग्रियों से पंचोपचार और षोडशोपचार पूजा पूरी की जाती है।
📿 पंचायतन पूजा विधि का क्रम
इस लेख में नीचे दी गई विधि पूरी तरह क्रमबद्ध है—
- शुद्धि और आचमन
- ध्यान और आवाहन
- सूर्य अर्घ्य और शिव अभिषेक
- गणेश, सूर्य, देवी और नारायण पंचोपचार
- शिव षोडशोपचार पूजन
- जप, स्तोत्र और आरती
- पुष्पांजलि, प्रदक्षिणा और क्षमा प्रार्थना
यह क्रम शास्त्रसम्मत है और दैनिक पूजा के लिए उपयुक्त है।
🙏 पंचायतन पूजा करते समय ध्यान रखें
- पूजा स्थान स्वच्छ और शांत रखें
- सभी देवताओं को समान भाव से पूजें
- मंत्रों का उच्चारण स्पष्ट करें
- श्रद्धा और भक्ति सबसे महत्वपूर्ण है
- जल्दबाजी न करें, प्रत्येक क्रिया को भाव से करें
✨ पंचायतन पूजा का आध्यात्मिक रहस्य
पंचायतन पूजा केवल एक अनुष्ठान नहीं है—यह एक समग्र आध्यात्मिक प्रणाली है, जिसमें सृष्टि की पाँच प्रमुख शक्तियों का संतुलन स्थापित किया जाता है।
जब साधक इस पूजा को नियमित रूप से करता है, तो वह धीरे-धीरे बाहरी पूजा से आंतरिक साधना की ओर बढ़ता है।
🪔 दैनिक पंचायतन पूजा का संपूर्ण विधि (मंत्र सहित)
🧘 शुद्धि
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा । यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः ॥
💧 आचमन
ॐ केशवाय नमः । ॐ नारायणाय नमः । ॐ माधवाय नमः । ॐ हृषीकेशाय नमः
🧴 तिलक
ॐ चंदनस्य महत्पुण्यं पवित्रं पापनाशनम् । आपदां हरते नित्यं लक्ष्मीः तिष्ठति सर्वदा ॥
📿 घण्टी
आगमार्थं तु देवानां गमनार्थं तु राक्षसाम्। कुर्वे घण्टारवं तत्र देवताः आवाहनार्थम्॥
🧘 ध्यान
शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्। प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये॥
🌞 सूर्य अर्घ्य
ॐ सूर्याय नमः (3 बार जल अर्पण)
🕉️ शिव अभिषेक
ॐ गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥
ॐ नमः शिवाय (11 बार)
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॥
🔥 दीप-धूप
शुभं करोति कल्याणं आरोग्यं धनसंपदा। शत्रुबुद्धि विनाशाय दीपज्योति नमोऽस्तुते॥
ॐ दीपज्योतिः परंब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः। दीपो हरतु मे पापं दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते॥
ॐ वनस्पतिरसोद्भूतो गन्धाढ्यो गन्ध उत्तमः। आघ्रेयः सर्वदेवानां धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम्॥
🐘 गणेश पंचोपचार
ॐ श्रीखण्डं चन्दनं दिव्यं गन्धाढ्यं सुमनोहरम् । विलेपनं सुरश्रेष्ठ चन्दन प्रतिगृह्मयताम्। चन्दन समर्पयामि ॥
ॐ मल्लिकादिसुगन्धीनि मालत्यादीनि वै प्रभो। मयानीतानि पुष्पाणि पूजार्थं प्रतिगृह्यताम्। पुष्पाणि समर्पयामि ॥
ॐ वनस्पतिरसोद्भूतो गन्धाढ्यो गन्ध उत्तमः । आघ्रेयः सर्वदेवानां धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम् । धूपमाघ्रापयामि ॥
ॐ चन्द्रमा मनसो जातश्चक्षोः सूर्योऽजायत । श्रोत्राद् वायुश्च प्राणश्च मुखादग्निरजायत ॥ दीपं दर्शयामि ॥
ॐ शर्करा खण्ड खाद्यादि दधि क्षीर घृतादिभिः। आहारैर्भक्ष्यभोज्यैश्च नैवेद्यं प्रतिगृह्यताम् । नैवेद्यं निवेदयामि ॥
🌞 सूर्य पंचोपचार
ॐ श्रीखण्डं चन्दनं दिव्यं गन्धाढ्यं सुमनोहरम् । विलेपनं सुरश्रेष्ठ चन्दन प्रतिगृह्मयताम्। चन्दन समर्पयामि ॥
ॐ मल्लिकादिसुगन्धीनि मालत्यादीनि वै प्रभो। मयानीतानि पुष्पाणि पूजार्थं प्रतिगृह्यताम्। पुष्पाणि समर्पयामि ॥
ॐ वनस्पतिरसोद्भूतो गन्धाढ्यो गन्ध उत्तमः । आघ्रेयः सर्वदेवानां धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम् । धूपमाघ्रापयामि ॥
ॐ चन्द्रमा मनसो जातश्चक्षोः सूर्योऽजायत । श्रोत्राद् वायुश्च प्राणश्च मुखादग्निरजायत ॥ दीपं दर्शयामि ॥
ॐ शर्करा खण्ड खाद्यादि दधि क्षीर घृतादिभिः। आहारैर्भक्ष्यभोज्यैश्च नैवेद्यं प्रतिगृह्यताम् । नैवेद्यं निवेदयामि ॥
🌸 देवी पंचोपचार
ॐ श्रीखण्डं चन्दनं दिव्यं गन्धाढ्यं सुमनोहरम् । विलेपनं सुरश्रेष्ठ चन्दन प्रतिगृह्मयताम्। चन्दन समर्पयामि ॥
ॐ मल्लिकादिसुगन्धीनि मालत्यादीनि वै प्रभो। मयानीतानि पुष्पाणि पूजार्थं प्रतिगृह्यताम्। पुष्पाणि समर्पयामि ॥
ॐ वनस्पतिरसोद्भूतो गन्धाढ्यो गन्ध उत्तमः । आघ्रेयः सर्वदेवानां धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम् । धूपमाघ्रापयामि ॥
ॐ चन्द्रमा मनसो जातश्चक्षोः सूर्योऽजायत । श्रोत्राद् वायुश्च प्राणश्च मुखादग्निरजायत ॥ दीपं दर्शयामि ॥
ॐ शर्करा खण्ड खाद्यादि दधि क्षीर घृतादिभिः। आहारैर्भक्ष्यभोज्यैश्च नैवेद्यं प्रतिगृह्यताम् । नैवेद्यं निवेदयामि ॥
🕉️ शिव षोडशोपचार पूजन
- आवाहन (हाथ जोड़कर शिव जी का ध्यान करें)
ॐ सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात्। स भूमिं विश्वतो वृत्वा अत्यतिष्ठद्दशाङ्गुलम्॥
ॐ आगच्छ भगवन् देव स्थानं ते कल्पयाम्यहम्। पूजां गृहाण देवेश सर्वाभीष्टफलप्रद॥ - आसन (अक्षत/फूल भगवान के नीचे या सामने रखें)
ॐ रम्यं सुशोभनं दिव्यं सर्वरत्नविभूषितम्। आसनं ते मया दत्तं गृहाण परमेश्वर॥ आसनं समर्पयामि॥ - पाद्य (थोड़ा जल चरणों में अर्पित करें)
ॐ गङ्गादि सर्वतीर्थेभ्यो निर्मलं तोयमुत्तमम्। पाद्यं गृहाण देवेश सर्वाभीष्टफलप्रद॥ पाद्यं समर्पयामि॥ - अर्घ्य (जल + अक्षत + फूल मिलाकर अर्पित करें)
ॐ गन्धपुष्पाक्षतैः युक्तं सुगन्धं पावनं जलम्। अर्घ्यं गृहाण देवेश भक्तानुग्रहकारक॥ अर्घ्यं समर्पयामि॥ - आचमन (थोड़ा जल अर्पित करें)
ॐ सर्वतीर्थसमायुक्तं सुगन्धि निर्मलं जलम्। आचमनीयं मया दत्तं गृहाण परमेश्वर॥ आचमनीयं समर्पयामि॥ - स्नान/अभिषेक (शिवलिंग पर जल/पंचामृत चढ़ाएँ)
ॐ गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥ - वस्त्र (कपड़ा अर्पित करें या मानसिक रूप से अर्पित करें)
ॐ सुशुक्लं वस्त्रं परमं दिव्यं निर्मलं सुमनोहरम्। वस्त्रं गृहाण देवेश सर्वाभरणभूषित॥ वस्त्रं समर्पयामि॥ - यज्ञोपवीत (जनेऊ अर्पित करें / या मानसिक)
ॐ यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात्। आयुष्यं ग्रहम् प्रतिमुञ्च शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः॥
यज्ञोपवीतं समर्पयामि॥ - गंध (चंदन तिलक लगाएँ)
ॐ श्रीखण्डं चन्दनं दिव्यं गन्धाढ्यं सुमनोहरम्। विलेपनं सुरश्रेष्ठ चन्दन प्रतिगृह्मयताम्। चन्दन समर्पयामि॥ - पुष्प (फूल/बेलपत्र अर्पित करें)
ॐ मल्लिकादिसुगन्धीनि मालत्यादीनि वै प्रभो। मयानीतानि पुष्पाणि पूजार्थं प्रतिगृह्यताम्। पुष्पाणि समर्पयामि॥ - धूप (धूप दिखाएँ / घुमाएँ)
ॐ वनस्पतिरसोद्भूतो गन्धाढ्यो गन्ध उत्तमः। आघ्रेयः सर्वदेवानां धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम्। धूपमाघ्रापयामि॥ - दीप (दीप घुमाएँ / आरती की तरह)
ॐ चन्द्रमा मनसो जातश्चक्षोः सूर्योऽजायत। श्रोत्राद् वायुश्च प्राणश्च मुखादग्निरजायत॥ दीपं दर्शयामि॥ - नैवेद्य (फल/मिठाई अर्पित करें)
ॐ शर्करा खण्ड खाद्यादि दधि क्षीर घृतादिभिः। आहारैर्भक्ष्यभोज्यैश्च नैवेद्यं प्रतिगृह्यताम्। नैवेद्यं निवेदयामि॥ - ताम्बूल (पान/इलायची अर्पित करें)
ॐ पूगीफलसमायुक्तं नागवल्लीदलैर्युतम्। ताम्बूलं प्रतिगृह्णातु ताम्बूलं समर्पयामि॥ - आरती (दीप से आरती करें)
ॐ कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥ - नमस्कार / प्रार्थना (दण्डवत या हाथ जोड़कर प्रणाम)
नमस्ते रुद्र रूपाय नमस्ते भक्तवत्सल। नमस्ते शम्भो महादेव नमस्ते करुणाकर॥
🏹 नारायण पंचोपचार
ॐ श्रीखण्डं चन्दनं दिव्यं गन्धाढ्यं सुमनोहरम् । विलेपनं सुरश्रेष्ठ चन्दन प्रतिगृह्मयताम्। चन्दन समर्पयामि ॥
ॐ मल्लिकादिसुगन्धीनि मालत्यादीनि वै प्रभो। मयानीतानि पुष्पाणि पूजार्थं प्रतिगृह्यताम्। पुष्पाणि समर्पयामि ॥
ॐ वनस्पतिरसोद्भूतो गन्धाढ्यो गन्ध उत्तमः । आघ्रेयः सर्वदेवानां धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम्। धूपमाघ्रापयामि ॥
ॐ चन्द्रमा मनसो जातश्चक्षोः सूर्योऽजायत । श्रोत्राद् वायुश्च प्राणश्च मुखादग्निरजायत॥ दीपं दर्शयामि ॥
ॐ शर्करा खण्ड खाद्यादि दधि क्षीर घृतादिभिः। आहारैर्भक्ष्यभोज्यैश्च नैवेद्यं प्रतिगृह्यताम्। नैवेद्यं निवेदयामि ॥
🍽️ नैवेद्य प्राण
ॐ प्राणाय स्वाहा । ॐ आपानाय स्वाहा । ॐ व्यानाय स्वाहा । ॐ उदानाय स्वाहा । ॐ समानाय स्वाहा ।
📿 जप
ॐ गणेशाय नमः (11) । ॐ नमः शिवाय (108) । श्री राम जय राम जय जय राम (21) । ॐ नमो भगवते वासुदेवाय (11)
📜 स्तोत्र
आदित्य हृदय स्तोत्र । सिद्ध कुंजिका स्तोत्रम् । हनुमान चालीसा । हनुमत द्वादश नाम स्तोत्र । राम रक्षा स्तोत्र ।
🌸 पुष्पांजलि
ॐ यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवास्तानि धर्माणि प्रथमान्यासन् । तेह नाकं महिमानः सचन्त यत्र पूर्वे साध्याः सन्ति देवाः ॥
ॐ नानासुगन्धपुष्पाणि यथा कालोद्भवानि च । पुष्पांजलिर्मया दत्ता गृहाण परमेश्वर ॥
🔄 प्रदक्षिणा
ॐ यानि कानि च पापानि ज्ञाताज्ञातकृतानि च । तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिणायाः पदे पदे ॥
🔔 आरती
ओम जय जगदीश हरे , स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे।ओम जय जगदीश हरे।
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का। स्वामी दुःख विनसे मन का। सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ओम जय जगदीश हरे।
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी, स्वामी शरण गहूं मैं किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी, ओम जय जगदीश हरे।
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी, स्वामी तुम अन्तर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी, ओम जय जगदीश हरे।
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता, स्वामी तुम पालन-कर्ता। मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता। ओम जय जगदीश हरे।
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति, स्वामी सबके प्राणपति। किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति। ओम जय जगदीश हरे।
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे, स्वामी तुम ठाकुर मेरे। अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे। ओम जय जगदीश हरे।
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा, स्वमी पाप हरो देवा। श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा। ओम जय जगदीश हरे।
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे, स्वामी जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे। ओम जय जगदीश हरे।
भगवान विष्णु की जय, माता लक्ष्मी की जय…
🙏 क्षमा प्रार्थना
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥
मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन। यत्पूजितं मया देव परिपूर्ण तदस्तु मे
🌺 निष्कर्ष
यदि आप एक ऐसी पूजा विधि चाहते हैं जो पूर्ण, संतुलित और शक्तिशाली हो, तो पंचायतन पूजा विधि (मंत्र सहित) सबसे उत्तम विकल्प है।
नीचे दी गई संपूर्ण विधि और मंत्रों का पालन करके आप घर पर ही शास्त्रोक्त तरीके से पंचायतन पूजा कर सकते हैं और अपने जीवन में शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति ला सकते हैं।
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