नीतीश कुमार की विवादास्पद टिप्पणी पर बवाल, बिहार विधानसभा में हंगामा

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को बिहार विधानसभा में आरजेडी विधायक रेखा पासवान पर एक विवादास्पद और महिला विरोधी टिप्पणी की, जिससे विपक्ष में भारी रोष पैदा हो गया है।

नीतीश कुमार की महिला विरोधी टिप्पणी

विधानसभा सत्र के दौरान, जब विपक्ष ने बिहार के आरक्षण कानूनों को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की, तब नीतीश कुमार ने यह टिप्पणी की। वह बोले, “आप महिला हैं, आपको कुछ पता है? बैठ जाइए और सुनिए।” इस टिप्पणी के तुरंत बाद विपक्ष ने कड़ी आलोचना की, खासकर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने।

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विपक्ष की मांगें और विरोध

विपक्ष ने बिहार के संशोधित आरक्षण कानूनों को न्यायिक समीक्षा से बचाने के लिए उन्हें संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की। उन्होंने सदन के वेल में इकट्ठा होकर नारेबाजी की और कार्यवाही बाधित की। नीतीश कुमार ने उन्हें याद दिलाया कि उनकी सरकार ने जाति सर्वेक्षण कर आरक्षण कोटे बढ़ाए हैं।

“पटना हाई कोर्ट ने आरक्षण कानूनों को निरस्त कर दिया है, और हमने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। केंद्र से भी औपचारिक अनुरोध किया गया है कि इन कानूनों को नौवीं अनुसूची में शामिल किया जाए,” कुमार ने कहा।

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तेजस्वी यादव की तीखी प्रतिक्रिया

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार की टिप्पणी की कड़ी निंदा की। उन्होंने मुख्यमंत्री पर महिलाओं पर “सस्ती, अनचाही, असभ्य, अभद्र और निम्नस्तरीय टिप्पणियां” करने का आरोप लगाया और इसे “राज्य के लिए बहुत गंभीर और चिंता का विषय” बताया।

“कुछ दिनों पहले, सीएम ने एक आदिवासी वर्ग की भाजपा महिला विधायक की सुंदरता पर अभद्र टिप्पणी की थी। आज, उन्होंने अनुसूचित जाति की महिला विधायक रेखा पासवान पर टिप्पणी की,” तेजस्वी यादव ने बताया।

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नीतीश कुमार का राजनीतिक यू-टर्न

नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा ने कई गठबंधन और टूटन देखी है। 2022 में एनडीए से अलग होकर आरजेडी के साथ हाथ मिलाने के बाद, 2024 में उन्होंने फिर से एनडीए का दामन थाम लिया। इससे बिहार की वर्तमान राजनीतिक स्थिति और जटिल हो गई है।

राजनीति में लैंगिक टिप्पणी का ऐतिहासिक संदर्भ

राजनीतिक क्षेत्र में महिला विरोधी टिप्पणियां नई नहीं हैं, और बिहार की राजनीतिक परिदृश्य में इस तरह की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। नीतीश कुमार की ताजा टिप्पणी ने इस मुद्दे को एक बार फिर सामने ला दिया है, जिससे राजनीति में सम्मानजनक और समावेशी संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

विधायी उपाय और लैंगिक समानता

यह घटना राजनीति में लैंगिक समानता की प्रगति और सम्मानजनक आचरण सुनिश्चित करने के लिए विधायी उपायों पर सवाल उठाती है। यह सार्वजनिक प्रतिनिधियों को लैंगिक संवेदनशीलता के बारे में प्रशिक्षित और संवेदनशील बनाने की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

जनता और मीडिया की प्रतिक्रिया

मीडिया और जनता ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, और कई लोग नीतीश कुमार से औपचारिक माफी की मांग कर रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस टिप्पणी पर चर्चाओं और बहसों से भरे हुए हैं, जिससे व्यापक अस्वीकृति का संकेत मिलता है।

नीतीश कुमार की नेतृत्व की व्यापक प्रभाव

यह घटना नीतीश कुमार के नेतृत्व और उनके राजनीतिक भविष्य पर व्यापक प्रभाव डाल सकती है। विशेष रूप से महिला मतदाताओं के बीच उनका समर्थन प्रभावित हो सकता है और यह बिहार के आगामी चुनावों को भी प्रभावित कर सकता है।

बिहार विधानसभा में नीतीश कुमार की टिप्पणी ने एक बड़ी विवाद को जन्म दिया है, जिससे विपक्षी नेताओं और जनता की कड़ी आलोचना हुई है। यह घटना राजनीति में लैंगिक संवेदनशीलता और सम्मानजनक संवाद की आवश्यकता को उजागर करती है। जैसे-जैसे राजनीतिक प्रतिघात जारी है, यह देखना बाकी है कि यह बिहार की राजनीतिक स्थिति और नीतीश कुमार के नेतृत्व को कैसे प्रभावित करेगा।


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