आख़िर तक – एक नज़र में
- केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय स्टार्टअप्स की दिशा पर सवाल उठाए, ‘दुकानदारी’ टिप्पणी की।
- इस पीयूष गोयल स्टार्टअप आलोचना पर संस्थापकों और निवेशकों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
- मोहनदास पई ने चीन से तुलना को अनुचित बताया और सरकारी नीतियों पर सवाल खड़े किए।
- अशनीर ग्रोवर ने कहा कि असलियत जानने की जरूरत राजनेताओं को है, स्टार्टअप्स को नहीं।
- ज़ेप्टो के आदित पलीचा ने कंज्यूमर इंटरनेट स्टार्टअप्स के महत्वपूर्ण योगदान का बचाव किया।
आख़िर तक – विस्तृत समाचार
पीयूष गोयल की टिप्पणी और स्टार्टअप जगत का विरोध
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की हालिया टिप्पणी ने भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में हलचल मचा दी है। गोयल ने पीयूष गोयल स्टार्टअप दिशा और फोकस पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारतीय स्टार्टअप्स फूड डिलीवरी और फैंटेसी गेमिंग ऐप बनाने में व्यस्त हैं। वहीं चीन जैसे देशों में स्टार्टअप्स ईवी, सेमीकंडक्टर, बैटरी और एआई पर काम कर रहे हैं। उनकी इस टिप्पणी से स्टार्टअप जगत में भारी विरोध देखने को मिल रहा है। भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है।
गोयल की ‘दुकानदारी’ वाली आलोचना
अपने भाषण के दौरान गोयल ने तीखे सवाल पूछे। उन्होंने कहा, “क्या हमें आइसक्रीम या चिप्स ही बनाना है? दुकानदारी ही करना है?” उन्होंने प्रश्न किया कि क्या देश सिर्फ गिग जॉब्स बनाने से संतुष्ट है। क्या हमें प्रमुख तकनीकों में गहरी नवीनता और दीर्घकालिक प्रगति का लक्ष्य नहीं रखना चाहिए? गोयल ने स्पष्ट रूप से भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम की मौजूदा प्राथमिकताओं पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने फूड डिलीवरी, सट्टेबाजी और फैंटेसी स्पोर्ट्स पर अत्यधिक ध्यान केंद्रित करने की आलोचना की। उन्होंने चीन के डीप टेक फोकस से इसकी तुलना की।
मोहनदास पई का पलटवार
गोयल की टिप्पणियों पर स्टार्टअप और टेक जगत की जानी-मानी हस्तियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। इंफोसिस के पूर्व सीएफओ और प्रमुख निवेशक मोहनदास पई ने चीन के साथ तुलना को अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि यह तुलना मददगार नहीं है। पई ने भारत में डीप टेक के विकास को धीमा करने में सरकारी नीतियों की भूमिका पर चिंता जताई। उन्होंने एक्स पर लिखा, “ये खराब तुलनाएँ हैं। भारत में भी उन सभी क्षेत्रों में स्टार्टअप हैं लेकिन वे छोटे हैं।”
पई ने आगे पूछा, “मंत्री @PiyushGoyal को हमारे स्टार्टअप्स को छोटा नहीं समझना चाहिए। उन्हें खुद से पूछना चाहिए कि हमारे मंत्री के रूप में उन्होंने भारत में डीप टेक स्टार्टअप्स को विकसित करने में क्या मदद की है?” उन्होंने भारत की वित्तीय प्रणाली और नियमों को बाधाएं पैदा करने के लिए दोषी ठहराया। उन्होंने वित्त मंत्रालय (@FinMinIndia @nsitharaman) पर एंजेल टैक्स को लेकर स्टार्टअप्स को परेशान करने का आरोप लगाया। पई ने कहा कि एंडोमेंट्स और बीमा कंपनियों को निवेश की अनुमति नहीं है, जबकि वे विश्व स्तर पर करते हैं। उन्होंने आरबीआई (@RBI) पर विदेशी निवेशकों और एआईएफ को प्रेषण पर नियमित रूप से परेशान करने का भी आरोप लगाया। पई ने बताया कि चीन ने 2014 से 2024 तक 845 अरब डॉलर का निवेश किया। भारत ने केवल 160 अरब डॉलर का निवेश किया। उन्होंने पूछा कि मंत्री इन मुद्दों को हल करने में मदद क्यों नहीं कर रहे हैं। यह पीयूष गोयल स्टार्टअप बहस का एक अहम पहलू है।
अशनीर ग्रोवर की तीखी प्रतिक्रिया
भारतपे के पूर्व सह-संस्थापक अशनीर ग्रोवर ने भी गोयल की आलोचना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। ग्रोवर ने कहा, “भारत में केवल जिन लोगों को ‘वास्तविकता जांच’ की आवश्यकता है, वे इसके राजनेता हैं। बाकी सभी भारत की पूर्ण वास्तविकता में जी रहे हैं।” उन्होंने कहा, “चीन में भी पहले फूड डिलीवरी आई और फिर डीप टेक विकसित हुआ। उन्होंने जो किया है, उसकी आकांक्षा करना बहुत अच्छा है।” ग्रोवर ने आगे कहा, “शायद राजनेताओं के लिए आज के रोजगार सृजनकर्ताओं को डांटने से पहले 20 वर्षों तक 10% से अधिक आर्थिक विकास दर की आकांक्षा करने का समय आ गया है। शायद ‘सार्वजनिक विमर्श’ को इतिहास से विज्ञान में बदलने का समय आ गया है!” उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में मंत्री को इस स्वस्थ बहस को शुरू करने के लिए धन्यवाद दिया।
ज़ेप्टो संस्थापक आदित पलीचा का बचाव
ज़ेप्टो के संस्थापक आदित पलीचा ने भी भारतीय स्टार्टअप और विशेष रूप से कंज्यूमर इंटरनेट स्टार्टअप्स का बचाव किया। उन्होंने केवल 3.5 साल पहले शुरू हुई ज़ेप्टो के प्रभाव पर प्रकाश डाला। ज़ेप्टो 2023 में यूनिकॉर्न बनी। यह क्विक ई-कॉमर्स में अग्रणी है। इसने अपने ऑनलाइन ऐप के माध्यम से 10 मिनट की डिलीवरी सेवा शुरू की। इसके प्रतिस्पर्धियों ने भी इसे अपनाया है। पलीचा ने कहा, “भारत में कंज्यूमर इंटरनेट स्टार्टअप्स की आलोचना करना आसान है। खासकर जब आप उनकी तुलना अमेरिका/चीन में बन रही गहरी तकनीकी उत्कृष्टता से करते हैं।” उन्होंने बताया, “वास्तविकता यह है: आज ज़ेप्टो पर लगभग 1.5 लाख वास्तविक लोग आजीविका कमा रहे हैं।”
पलीचा ने बताया कि ज़ेप्टो हर साल सरकार को 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का टैक्स चुकाती है। इसने एक अरब डॉलर से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) लाया है। इसने भारत की आपूर्ति श्रृंखलाओं में सैकड़ों करोड़ का निवेश किया है। यह विशेष रूप से ताजे फल और सब्जियों के लिए है। उन्होंने कहा, “अगर यह भारतीय नवाचार में चमत्कार नहीं है, तो मुझे सच में नहीं पता कि क्या है।” पलीचा ने तर्क दिया कि भविष्य की तकनीकों को विकसित करने के लिए बड़े पैमाने पर इंटरनेट कंपनियां महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने पूछा, “भारत का अपना बड़े पैमाने पर मूलभूत एआई मॉडल क्यों नहीं है? इसका कारण यह है कि हमने अभी तक महान इंटरनेट कंपनियां नहीं बनाई हैं।”
उन्होंने अपनी बात का समर्थन करने के लिए वैश्विक उदाहरण दिए। “पिछले दो दशकों में अधिकांश प्रौद्योगिकी-आधारित नवाचार कंज्यूमर इंटरनेट कंपनियों से उत्पन्न हुए हैं। क्लाउड कंप्यूटिंग किसने बढ़ाया? अमेज़न। आज एआई में बड़े खिलाड़ी कौन हैं? फेसबुक, गूगल, अलीबाबा, टेनसेंट – सभी कंज्यूमर इंटरनेट कंपनियों के रूप में शुरू हुए।” पलीचा ने बताया कि इन कंपनियों के पास सर्वश्रेष्ठ डेटा, प्रतिभा और पूंजी तक पहुंच होती है। यह उन्हें नवाचार चलाने में मदद करता है। उन्होंने मजबूत स्थानीय इंटरनेट कंपनियां बनाने में मदद के लिए भारत सरकार और पूंजी मालिकों से बेहतर समर्थन का आह्वान किया। उन्होंने स्वीकार किया कि ज़ेप्टो को अभी लंबा रास्ता तय करना है। लेकिन यह दीर्घकालिक नवाचार में निवेश करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह पूरी पीयूष गोयल स्टार्टअप बहस को नया आयाम देता है।
भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम की स्थिति
स्टार्टअप इंडिया वेबसाइट के अनुसार, भारत लगभग 20,000 स्टार्टअप्स का घर है। इनमें से लगभग 4,750 प्रौद्योगिकी-आधारित हैं। देश में वर्तमान में 110 यूनिकॉर्न हैं। हालांकि, नए यूनिकॉर्न बनने की गति धीमी हो गई है। यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल करने वाला आखिरी भारतीय स्टार्टअप सितंबर 2024 में मनीव्यू था। 2024 में कुल मिलाकर केवल पांच स्टार्टअप यूनिकॉर्न बने। पीयूष गोयल स्टार्टअप पर बहस इस पृष्ठभूमि में और महत्वपूर्ण हो जाती है।
आख़िर तक – याद रखने योग्य बातें
- पीयूष गोयल स्टार्टअप पर ‘दुकानदारी’ टिप्पणी ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है।
- स्टार्टअप संस्थापकों और निवेशकों ने गोयल की आलोचना का जोरदार खंडन किया है।
- मोहनदास पई ने डीप टेक के धीमे विकास के लिए सरकारी नीतियों और नियामक बाधाओं को जिम्मेदार ठहराया।
- अशनीर ग्रोवर और आदित पलीचा ने कंज्यूमर इंटरनेट स्टार्टअप्स के आर्थिक योगदान और विकास क्षमता पर जोर दिया।
- भारत का विशाल स्टार्टअप इकोसिस्टम हाल के दिनों में यूनिकॉर्न निर्माण में मंदी का सामना कर रहा है।
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