आख़िर तक – एक नज़र में
- केंद्र सरकार ने तमिलनाडु की NEET छूट याचिका को अस्वीकार कर दिया है।
- मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने 9 अप्रैल को सभी विधायकों की बैठक बुलाई है।
- स्टालिन का तर्क है कि NEET परीक्षा ग्रामीण छात्रों के लिए अनुचित है।
- तमिलनाडु ने NEET छूट के लिए विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा था।
- मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि NEET के खिलाफ राज्य का संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है।
आख़िर तक – विस्तृत समाचार
तमिलनाडु में NEET पर घमासान: केंद्र के इनकार के बाद स्टालिन ने बुलाई अहम बैठक
तमिलनाडु में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) को लेकर विवाद गहरा गया है। केंद्र सरकार ने राज्य की NEET छूट याचिका को खारिज कर दिया है। इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बाद, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने तत्काल कदम उठाए हैं। उन्होंने 9 अप्रैल की शाम को सचिवालय में राज्य के सभी विधायकों की एक सलाहकार बैठक बुलाई है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य NEET छूट याचिका खारिज होने के बाद भविष्य की रणनीति पर विचार-विमर्श करना है।
केंद्र का इनकार और स्टालिन की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री स्टालिन ने केंद्र सरकार के फैसले पर निराशा व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही केंद्र ने NEET छूट के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया हो, लेकिन NEET के खिलाफ तमिलनाडु की लड़ाई किसी भी तरह से खत्म नहीं हुई है। स्टालिन ने कहा, “संघ सरकार ने भले ही NEET से छूट की हमारी मांग खारिज कर दी हो, लेकिन हमारा संघर्ष जारी रहेगा।” यह बयान राज्य सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। आगामी विधायक बैठक में इस संघर्ष की अगली रूपरेखा तय की जा सकती है।
NEET का प्रभाव: ग्रामीण बनाम शहरी छात्र
मुख्यमंत्री स्टालिन ने अपने संबोधन में बार-बार NEET के नकारात्मक प्रभावों को उजागर किया है। उनका मुख्य तर्क यह है कि यह परीक्षा सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। स्टालिन ने कहा, “NEET उन शहरी छात्रों को असंगत रूप से लाभ पहुंचाता है जो महंगे कोचिंग सेंटर का खर्च उठा सकते हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि NEET ने विशेषाधिकार प्राप्त और वंचित उम्मीदवारों के बीच की खाई को और चौड़ा कर दिया है।
स्टालिन के अनुसार, NEET परीक्षा की शुरुआत के साथ, ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए चिकित्सा की पढ़ाई का सपना लगातार पहुंच से बाहर होता जा रहा है। इन छात्रों के पास अक्सर महंगी कोचिंग सुविधाओं तक पहुंच नहीं होती है। यह स्थिति तमिलनाडु के समावेशी विकास के लक्ष्य के विपरीत है।
तमिलनाडु का पुराना मेडिकल प्रवेश सिस्टम
मुख्यमंत्री ने राज्य की दशकों पुरानी मेडिकल प्रवेश प्रणाली की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली ने देश के कुछ सर्वश्रेष्ठ डॉक्टरों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह प्रणाली सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के छात्रों को भी अवसर प्रदान करती थी। NEET के लागू होने से यह संतुलन बिगड़ गया है। राज्य सरकार का मानना है कि पुरानी प्रणाली अधिक न्यायसंगत थी।
NEET छूट के लिए राज्य के सतत प्रयास
तमिलनाडु सरकार ने NEET छूट हासिल करने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। स्टालिन ने बताया, “तमिलनाडु के लोगों की सामूहिक आवाज को दर्शाते हुए, राज्य सरकार ने NEET के प्रभाव की गहन जांच के लिए न्यायमूर्ति एके राजन के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया था।” इस समिति की सिफारिशों के आधार पर, तमिलनाडु विधानसभा में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया गया था।
इसके बाद, NEET छूट की मांग करने वाले विधेयक को राज्यपाल के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजा गया। स्टालिन ने कहा कि केंद्रीय मंत्रालयों को विस्तृत स्पष्टीकरण भी प्रदान किए गए थे। उन्होंने कहा, “हमारे सभी प्रयासों और सही दलीलों के बावजूद, केंद्र सरकार ने तमिलनाडु के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया है।” यह निर्णय राज्य के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें 9 अप्रैल की विधायक बैठक पर टिकी हैं।
आख़िर तक – याद रखने योग्य बातें
- केंद्र सरकार ने तमिलनाडु की NEET छूट की मांग को खारिज कर दिया है।
- मुख्यमंत्री एमके स्टालिन 9 अप्रैल को विधायकों के साथ भविष्य की रणनीति पर बैठक करेंगे।
- NEET परीक्षा पर ग्रामीण छात्रों और महंगे कोचिंग सेंटरों को लेकर चिंता जताई गई है।
- राज्य ने एके राजन समिति की रिपोर्ट के आधार पर NEET छूट के लिए विधेयक पारित किया था।
- तमिलनाडु सरकार NEET के खिलाफ अपना संघर्ष जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
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