आख़िर तक – एक नज़र में
- राज्यसभा उपाध्यक्ष जगदीप धनखड़ के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव खारिज किया गया।
- यह प्रस्ताव 10 दिसंबर को संविधान के अनुच्छेद 67(बी) के तहत प्रस्तुत किया गया था।
- डिप्टी चेयरमैन हरिवंश ने इस प्रस्ताव को जल्दबाज़ी में और त्रुटिपूर्ण बताया।
- उन्होंने कहा कि प्रस्ताव उपाध्यक्ष की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए था।
- विपक्ष और सरकार के बीच इस मुद्दे पर राज्यसभा में तीखी बहस हुई।
आख़िर तक – विस्तृत समाचार
प्रस्ताव के पीछे की पृष्ठभूमि
राज्यसभा उपाध्यक्ष जगदीप धनखड़ के खिलाफ विपक्ष द्वारा 10 दिसंबर को अनुच्छेद 67(बी) के तहत अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया। यह भारतीय संविधान के अनुसार किसी भी उपाध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई का एक प्रावधान है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि उपाध्यक्ष का आचरण निष्पक्ष नहीं है, और वह सरकार के पक्ष में झुके हुए हैं।
डिप्टी चेयरमैन का फ़ैसला
डिप्टी चेयरमैन हरिवंश ने इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि यह त्रुटिपूर्ण है और जल्दबाजी में तैयार किया गया है। उन्होंने इसे उपाध्यक्ष की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास बताया। उनकी टिप्पणियों ने सदन में तीखी प्रतिक्रिया उत्पन्न की, जहां सरकार और विपक्ष के बीच तनाव बढ़ गया।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
विपक्ष ने दावा किया कि अविश्वास प्रस्ताव एक वैध कदम था और इसे अस्वीकार करने का निर्णय लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के खिलाफ है। उनके अनुसार, यह उपाध्यक्ष की कार्यशैली की समीक्षा का एक प्रयास था, लेकिन इसे राजनीति का रंग दे दिया गया।
सरकार का रुख
सरकार ने इस मुद्दे पर विपक्ष को आड़े हाथ लिया और कहा कि प्रस्ताव अनुचित था। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल सदन की प्रक्रिया बाधित करना चाहता था।
आख़िर तक – याद रखने योग्य बातें
- विपक्ष ने जगदीप धनखड़ पर निष्पक्षता में कमी का आरोप लगाया।
- अविश्वास प्रस्ताव जल्दबाज़ी में तैयार होने के कारण खारिज हुआ।
- सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर तीखा वाद-विवाद हुआ।
- सदन में उपाध्यक्ष की निष्पक्षता पर जोर देने का संदेश।
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